Wednesday , February 21 2018
Home / Local / हर आंख का आंसू कहता था एक दु:ख भरी कहानी!

हर आंख का आंसू कहता था एक दु:ख भरी कहानी!

कल ओखला में दिल्ली महिला आयोग की पंचायत और जनसुनवाई में शरीक हर औरत आंखों में आंसू भरकर बैठी थी और हिचकियों में डूबी उसकी दास्तान सुनना मुश्किल था। शायद इन्हीं हालात के लिए कवि ने कहा है:

अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी।
आंचल में है दूध और आंखों में पानी।।

आख़िर यह समाज इतना बेरहम कैसे हो गया? जो औरत इंसान को जन्म देती है वह बेबस और कमज़ोर क्यों हो जाती है? जिस मर्द को उसकी मुहब्बत और क़ुरबानियों के ऐवज में उसका हमेशा शुक्रगुज़ार होना चाहिये था वह उसपर एक बेरहम हमलावर कैसे बन गया? जो नवजवान अपनी बहिन की हिफाज़त में अपनी जान तक दे देता है वही दूसरे की बहिन को माल क्यों समझने लगता है? जो औरत किसी और औरत की हिमायत में खड़ी होनी चाहिये थी, कई बार वही दूसरी औरत पर ज़ुल्म की वजह भी बन जाती है। जिस पुलिस को मज़लूम औरतों की हिफाज़त की ज़िम्मेदारी दी गई वह भी बेपरवाह क्यों नज़र आती है?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ उसकी हेल्पलाइन 1091 और 100 नंबर पर पिछले साल 2.79 लाख औरतों की कॉल आई मगर कार्रवाई सिर्फ 4,662 (1.7%) केस पर ही हो पाई। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने बताया कि दिल्ली में औरतों के ख़िलाफ ज़ुल्म के पिछले साल 31,446 केस रजिस्टर किये गये मगर सज़ा सिर्फ 146 मामलों में ही हो पाई। आयोग की हेल्पलाइन 181 पर इसकी लॉच के छ: महीने में ही 2.14 लाख कॉल नोट की गई। साल दर साल बढ़ते ये आंकड़े बताते हैं कि यह हमारे सिस्टम की नाकामी और एक बड़ी तबाही की शुरुआत है।

समाज में ज़ुल्म के ख़िलाफ और इंसाफ के लिए एक बेहिसी पनप रही है। जिस तरह सड़क पर तड़पते आदमी की परवाह किये बिना लोग गुज़र जाते हैं ऐसा ही हमारे आसपास भी होता है। किसी पर ज़ुल्म होता देखकर लोग आंख बंद कर लेते हैं कि हमें क्या? कभी कभी ऐसा भी होता है कि जिस पर ज़ुल्म होता है वह डरकर या किसी और वजह से ज़ालिम से समझौता कर लेता है और उसकी हिमायत में उठे लोग ठगे से रह जाते हैं। सही कहा गया है कि ज़ुल्म को सहने से ज़ुल्म बढ़ता है।

ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं हमारी परवरिश और सोच में ही कुछ ख़राबी आ गई है जो समाज को एक तबाही की ओर धकेल रहे हैं। अगर इस तबाही से बचना है तो हमें अपनी सोच को बदलना होगा और नई नस्लों को भी औरत की इज़्ज़त करना सिखाना होगा।

अब्दुल रशीद अगवान

If you have news tip or story idea, photo or video please email at greenokhla@gmail.com to strengthen local governance and community journalism. Also you can join us and become a source for OT to help us empower the marginalized through digital inclusion.

Check Also

mayor

Project buniyad launched to enhance basic education level at schools

Education Department of SDMC is starting a Buniyad Project from April 2018 to enhance basic …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code

Powered by moviekillers.com