Wednesday , August 23 2017
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छात्रों ने किया जामिया प्रशासन को झुकने पर मजबूर (photo slideshow)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नए सत्र के लिए प्रवेश परीक्षा के फॉर्म जारी हो गए है जिसके साथ ही नया विवाद शुरू हो गया है, इस साल जारी
प्रोस्पेक्टस में अधिकतम पाठ्यक्रमों की फीस बड़ा दी गई है, जिसके विरोध में आज सेंट्रल कैंटीन के सामने धरना दिया।

छात्रों का कहना है की पिछले पांच सालो में चार बार फीस में बढ़ोतरी हुए है और साथ ही इस साल से हर पाठयक्रम के लिए अलग फॉर्म भरना होगा जबकि पिछले साल तक कम से कम 3 पाठ्यक्रमो के लिये एक ही फॉर्म भरना होता था और एक ही प्रवेश परीक्षा देनी होती थी।

जामिया के छात्र का कहना है की बात सिर्फ 400 रु की नही है जामिया एक अल्पसंख्यक संस्थान है यहाँ ऐसे छात्र भी आते है जिनकी आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नही होती, इस लिये जामिया के जितने भी छात्र समूह है सबने इसका एक साथ विरोध किया है।

इसके लिये छात्रो ने एक सिग्नेचर कैम्पेन चलाया , जामिया प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आने पर जामिया के कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूखड़ताल पर बैठ गए।

लेकिन शाम होते होते जामिया प्रोक्टर और डी एस डब्लू तसनीम मीनाई ने छात्रो को यह लिखित आश्वासन दिया है की बढी हुई फीस को वापस ले लिया गया है और साथ ही अब छात्रो को प्रवेश परीक्षा के लिये एक फैकल्टी में तीन पाठ्यक्रमो के लिये एक ही फॉर्म भरना होगा। छात्रो ने इसे जामिया के हर छात्र की जीत बताया जिसके साथ छात्रो ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म किया।

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One comment

  1. اب وقت آگیا ہے کہ جامعہ میں طلبا یونین بحال ہو۔ نجیب جنگ کے بعد جب طلعت احمد آئے اور وعدہ کیا تھا کہ انہیں بھی خود لگتا ہے طلبہ
    یونین بحال ہونا چاہئے مگر آپ بھی اب تک وعدہ وفا نہیں کرپائے ہیں۔ایسے میں جامعہ برادری کو سوچنے کی ضرورت ہے کہ آیا طلبہ یونین ضروری ہے یا نہیں۔ جامعہ جیسے ادارے میں جب تدریسی اور غیر تدریسی ملازم کا اپنا یونین ہے طالب علم کو بھی اپنی آواز بلند کرنے واسطے یونین کی مانگ کرنی چاہئے تاکہ اپنی دشواریوں کو حل کرسکے۔

    خاکسار۔

    جاوید اختر
    دربھنگہ
    بہار

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