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‘इस मजलूम बेवा का साथ दें और ज़ालिमों के खिलाफ आवाज़ उठाये ओखला वाले’

रमजान के महीने का वारदात जो आपको शर्मिंदा करदेी 72 साल मेहरुन्निसा जो ज़ाकिर नगर में रहती है बनी ज़मीन कब्ज़ा करने वाले बदमाशोस की शिकार, कहा परवेज़ आलम खान नेI

उनहोंने बताया के कब्ज़ा करने वाले लोग बहार से ऐ हुए थेी उनहोंने बताया की खातून नो मुस्लिम हैंI

उनके पोस्ट चर्चे मैं हैं और लोगों का कहना है कब्ज़ा गैंग इलाके मैं बहुत एक्टिव हैI

परवेज़ आलम खान ने लिखा: “ये हैं 72 साल की बुजूर्ग मेहरुन्निसा जिनके शौहर का एक माहीना पहले इंतेकाल हो गया और अभी ईद्दत में थीI इनको कोई औलाद नही हैंI इसी का फायदा ऊठा के … ने इनके मकान पे कब्जा करने की कोशिश की और इनके साथ गाली गलौज और मारपिट किया और जब मै बचाने गया तो ईन गुण्डों ने मेरे ऊपर जानलेवा हमला कर दियाI

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“FIR दर्ज हो गया लेकिन अभी तक कोई भी बदमाश गिरफतार नही हुआI मै ओखला के तमाम अमन पसंद लोगों से गुजारिश करता हु की इस मजलूम बेवा का साथ दे और ज़ालिमों के खिलाफ अपनी आवाज़ उठायेI अल्लाह मुझे और आप सबको ईन ज़ालिमों के खिलाफ आवाज़ उठाने की तौफिक दे और इस बुजूर्ग का साथ देI”

एक्टिविस्ट अमीक जमीं ने लिखा: “ओखला मे कहावत है की जनाब हज करके आये है तो कही दो सौ गज़ का प्लाट जरूर कबजा करेंगे, परवेज से मिलिये किसी बेवह जईफ का फ्लैट कब्जे हो रहा था जो यहा आम बात है मध्यस्थता कराने पहुचे उनपे हमला हो गया, रमजान चल रहा है टोपिया पहनने वाले हमारे ही लोग है, रगो मे हराम की दौलत, सूद का पैसे का खून बहे तो धर्म मजहब और रमज़ान कुछ नही यहा! गेट वेल सून परवेज़ साहब!”

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2 comments

  1. In okhla area, where 97% residents are Muslims, smd it is month of Ramdan,, and few peoples are trying to taking flat from a widow by force,, how itvis possible?and how peoples are quite, if peoples are not telling and doing against this unjust, I do not think theyvare Muslims,how there Fasting and prayeers will be acceppted by Allah.
    But it is now character of Muslims, all over the world and especially in IndIa, peoples are beating them,killing them, raping them, robbing them but they are, action less , emotionless, and like deads

  2. Why there is need to add these type of comments in news.

    The news should be restricted up to incidents and not add personal stereotypes

    एक्टिविस्ट अमीक जमीं ने लिखा: “ओखला मे कहावत है की जनाब हज करके आये है तो कही दो सौ गज़ का प्लाट जरूर कबजा करेंगे, टोपिया पहनने वाले हमारे ही लोग है, रगो मे हराम की दौलत, सूद का पैसे का खून बहे तो धर्म मजहब और रमज़ान कुछ नही यहा

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