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मम्मीः हॉलीवुड की एक और मसाला फिल्म

अगर टॉम क्रूज की नई फिल्म देखें तो कह सकते हैं कि सच में ग्लोबलाइजेशन का असर चीजों के साथ साथ विभिन्न देशों की फिल्मों के चरित्र चित्रण, चिंतन, चैतन्यावस्था पर भी पड़ा है. इस फिल्म में पूरब की प्राचीन सभ्यता, खासकर मिस्र का मूल मंत्र यानी पुनर्जन्म के सूत्र को पाश्चात्य सभ्यता के मूल मंत्र यानी प्रेम के साथ मिालाकर एक मसाला और मनरोरंजक फिल्म बनाई है. शायद हॉलीवुड के फिल्मकारों को पूरबी सभ्यता का 5000 साल पुराना इतिहास पाश्चात्य सभ्यता के 500-700 साल के मुकाबले में ज्यादा आकर्षित करता है: सुशील कुमार.

इस फिल्म की खास बात है कि निर्देशक ने इस फिल्म का नाम मम्मी मम्मी रखकर सार्वजनिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि फिल्म का नाम ही पुराना नहीं है बल्कि दर्शक पुरानी तीन मम्मी फिल्मों जैसी कहानी और स्पेशल इफेक्ट की उम्मीद रखें. और फिल्म देखने पर दर्शकों को मायूसी नहीं मिलती.

अगर आप इस पर गौर करें कि फिल्म में क्या नया और क्या पुराना है तो आप पाएंगे कि इसके अधिकांश अंश पहले बनी फिल्मों से लिया गया है. इसकी वजह से पता ही नहीं चलता है कि कोई नई फिल्म देख रहे हैं या कई पुरानी हॉलीवुड फिल्मों की क्लिप का एक मोंटाज देख रहे हैं. जैसे फिल्म में डर पैदा करने वाले तत्व चमगादड़, बीटल, मकड़ी और कौवे सिर्फ मम्मी फिल्म सिरीज में ही नहीं बल्कि बहुत फिल्मों में हुए हैं. अल्फ्रेड हिचकॉक की फिल्म बर्ड्स ने कौवों द्वारा डर को बखूबी पैदा किया और दर्शकों को डराया. इसी तरहा लाखों कीड़ों और चूहों की भीड़ का आक्रमण हैरिसन फोर्ड की इंडियाना जोंस सिरीज में बखूबी डर पैदा करता है. मम्मी सिरीज में भी इन कीड़ों और चमगादड़ों का इस्तेमाल दोहराया गया है. इस फिल्म में खलनायक ने रेतीला तूफान पैदा किया है, जो पुरानी फिल्म जैसा ही है. पुरानी मम्मी में पुरुष खलनायक ने यह काम किया था जबकि टॉम क्रूज की फिल्म में इस हरकत को एक महिला खलनायक ने अंजाम दिया है, जिसकी वजह से हीरो और हीरोइन, दोनों जान बचाकर भागते हैं. यहां तक कि स्पाइडर फिल्म में भी इस रेतीले तूफान को अमेरिका के एक शहर में दिखाया है. और सबसे चकित करने वाली बात यह है कि खुद टॉम क्रूज की फिल्म मिशन इम्पॉसिबल में रेतीले तूफान का दृश्य है, जिससे वे फिल्म में भागते ही रहे. हो सकता है कि टॉम क्रूज को इसके लिए खास कोई मेहनत करनी पड़ी हो या फिर भागने के उसी दृश्य को उन्होंने मम्मी में इस्तेमाल कर लिया हो (हालांकि ऐसा कतई नहीं है). फिल्म में पुरानी भाषा का प्रयोग भी पुरानी मम्मी फिल्मों की ही तरह है—मालूम नहीं कि यह एक फिल्म के लिए लिखी एक भाषा है या नहीं, शायद हो भी सकती है. उसी तरह बॉडी टैटू भी पुरानी फिल्मों जैसे अर्नाल्ड श्वार्जनेगर ने इस्तेमाल किया था, उसी तरह है और आधुनिक पीढ़ी के साथ जुड़ जाता है. फिल्म में आधुनिक इमारतों का चकनाचूर हो जाना हॉलीवुड फिल्म इनसेप्शन में उपयोग की तरह ही है.

अगर गौर करें तो पूरे फिल्मी इतिहास में हॉलीवुड पूर्वी सोच/आध्यामिकता को पश्चिम के भौतिकतावाद के साथ मिलाकर फिल्में बनाता रहा है. याद करें एलिजाबेथ टेलर को विश्व सुंदरी क्लियोपाट्रा की भूमिका में. पश्चिमी मुल्कों में खासकर हॉलीवुड का मिस्र के पुराने मकबरों और पुनर्जन्म में रुचि पुरानी है. इस फिल्म में भी मिस्र की एक खूबसूरत राजकुमारी का काला जादू अपनाना और नष्ट होना, एक सुनसान रेगिस्तान में दफनाया जाना पूरब के तंत्र विद्या को नकारात्मक रूप में दर्शाता है. हॉलीवुड ईसाई चिंतन को दर्शाने के लिए इसके नकारात्मक मोटिफ को चित्रित करता है. पुरानी मम्मी फिल्मों में भी काला जादू एक गुफा, मकबरा या एक बक्सा या दरवाजा जो एक चाबी से खुलता है और उसी तरह इस फिल्म में भी एक खंजर और एक पत्थर का प्रयोग काला जादू की मान्यताओं को दर्शाता है.

फिल्म में दोस्त और दोस्ती एक पाश्चात्य चेतना का फ्रैंकेनस्टीन दानव के मोटिव से तादतम्य है और इसका सैकड़ों हॉलीवुड फिल्मों में प्रयोग हुआ है (इस फिल्म में भी रसेल क्रोव का चरित्र कुछ ऐसा ही है). और मम्मी फिल्म के दफनाए मुर्दों का बार-बार जिंदा होकर बारी-बारी से हीरो को मारने की कोशिश को पूरा कॉपी किया गया है. मिट्टी से सने कंकाल, जो आधे कंकाल और आधे मनुष्य हैं, और राजा-रानी के सैनिक या साथी थे जो उनके साथ ही पुनर्जीवित हो जाते हैं, और उन पर बंदूक की गोलियां का इतना ही असर होता है कि हीरो-हीरोइन बचकर भाग जाएं.

हॉलीवुड फिल्म पुरातत्ववेत्ता के चरित्र से बहुत प्रभावित हैं. जैसे कि हैरिसन फोर्ड का इंडियना जोंस चरित्र बार-बार इस्तेमाल किया गया है. द इंग्लिश पेशेंट में भी पुरातत्ववेत्ता का इस्तेमाल किया गया है.

इस फिल्म के निर्देशक की काबिलियत कहें या समाज की तारीफ करनी होगी कि यह जानते हुए कि फिल्म की कहानी कई मम्मी फिल्मों में बार-बार उपयोग हुई है, उसने समकालीन विषयों और परिस्थितियों का उपयोग किया है, जैसे कि इराक युद्ध की पृष्ठभूमि, रेगिस्तान (जो बार-बार कई फिल्मों जैसे लॉरेंस ऑफ अरेबिया, सहारा, द इंग्लिश पेशेंट इत्यादि) अति आधुनिक हथियार जैसे जीरो ग्रेविटी वाला हवाई जहाज और टेलिस्कोपिक गन वगैरह, वगैरह. यहां तक कि निर्देशक ने ब्रिटेन में नई सदी की बनती हुई अंडरग्राउंड ट्रेन की पृष्ठभूमिक और खुदाई की मशीनों को दर्शाया है. यहां तक पुरानी मम्मी फिल्मों की तरह इसमें भी गंजे व्यक्ति को खलनायक के तौर पर पेश किया गया है. और पुरानी फिल्म की ही तरह ही फिल्म में लंदन की पृष्ठभूमि आती है. फर्क सिर्फ यह है कि पुरानी मम्मी में लंदन की मशहूर खुली लाल टूरिस्ट बस का उपयोग किया है और इस फिल्म में अंडरग्राउंड मेट्रो बनाने की पृष्ठभूमि को. इसमें ग्लेडिएटर फिल्म की ही तरह बाप की हत्या और उसके हस्र को दर्शाया गया है. इस फिल्म में वीएफएक्स या स्पेशल इफेक्ट का कमाल देखने को मिलता है, जैसे हवाई जहाज का क्रैश होना, जमीन के नीचे बार-बार भूत-पिशाचों में हाथापाई. संक्षेप में कह सकते हैं कि फिल्म लेखकरों और निर्देशकों ने समय और स्थान को कंप्रेस कर दिया है (आइंस्टीन के सिद्धांत का उपयोग किया है!) क्योंकि कहां मिस्र के मिथ हैं, कहां पुराविज्ञिान मिले हुए हैं (इराक के रेगिस्तान में), घटनाएं हजारों साल पहले हुईं और वर्तमान में कहानी का प्लॉट उभरता है, कहां राज दरबार के उत्तराधिकार का सवाल और कहां अति आधुनिक प्रेम कथा, जिसमें आज के वैल्यूज जैसे वफादारी, कुर्बानी या बलिदान, कर्म के फल का दर्शन, या कहें कि पुरानी सभ्यता के मूल्यों को बुनियादी ईसाई मूल्यों के बेहतरीन पक्ष को एक रूप में दिखाने की कोशिश भी समय और स्थान के कंप्रेशन का सूचक है. यहां तक इसे इतिहास से जोडऩे के लिए फिल्म में क्रूसेड्स या धर्म युद्ध का भी जिक्र है. अच्छी बात यह है कि प्राचीन मिस्र की लिपि को पहचाना और पढ़ा गया है, जिस दिन हमारी सिंधु घाटी सभ्यता के स्क्रिप्ट को पहचाना जाने लगेगा, आप हॉलीवुड और बॉलीवुड, दोनों में बहुत सारी फिल्में इस विषय पर बनते हुए देखेंगे.

फिल्म यह भी दर्शाती है कि समय के साथ सुंदरता मूल्य भी कैसे बदल जाते हैं. क्लियोपाट्रा में एलिजाबेथ टेलर को उनकी सुंदरता के साथ साथ उनकी कामुकता के लिए भी चुना था और उनकी अपील दशकों तक चर्चित रही. इस फिल्म में दोनों, पुराने मिस्र की राजकुमारी और आधुनिक हीरोइन, महिलाओं में प्रचलित पतलेपन को दर्शाती हैं. पतले शरीर का आधुनिक प्रचलन मौजूदा पीढ़ी की योगासन की मुद्राओं को कहीं और इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति को दिखाती है. बहुत लोगों को मालूम नहीं होगा कि प्रिंसेस डायना जैसी हस्ती भी इस पतले शरीर के पागलपन से प्रताडि़त थीं और पूरी फैशन इंडस्ट्री इस प्रचलन का प्रचार करती है.

कहने का मतलब है कि यह फिल्म कई फिल्मों की कहानियों का मिश्रण है और अगर यही काम अगर कोई बॉलीवुड वाला करता तो खुद यहां उसकी बिरादारी के लोग उस पर शर्मनाक नकल का लेबल चस्पां करके उसकी आलोचना करते. आश्चर्य की बात है कि हॉलीवुड और अमेरिका में कॉपीराइट का कठोर कानून होते हुए भी किसी ने इस पर नकल करने और इंटलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट्स की चोरी का कोई केस नहीं किया और अगर यही काम बॉलीवुड ने किया होता तो भारत में मुकदमा दर्ज कर दिया गया होता.

इस तरह की फिल्मों की खासियत यह है कि इस तरह की फिल्में बहुत कम रोशनी में शूट की जाती हैं जिससे आपके मन में आशंकाएं पैदा हों और हल्की सी आवाज भी आपको झकझोर दे. इसलिए इस तरह की फिल्मों में आपको बेहद तेज आवाज से चौंकाने का सफल प्रयोग देखने को मिलेगा. फिल्म के दृश्यों में संगीत को एक दम से बढ़ा और घटाकर दर्शकों को बांधे रखा जाता है और उसी के जरिए डराया जाता है जैसा कि डरावनी फिल्मों में होता है.

फिल्म में ऐक्टिंग करने के लिए किसी भी कलाकार के पास कोई चैलेंज नहीं है. रसेल क्रो जैसा कलाकार एकदम बेजान हो गया है जैसा कि सत्तर के दशक की फिल्म सुपरमैन में मार्लन ब्रांडो था. टॉम क्रूज ने इस फिल्म में स्लीपवॉक किया है, या कहें कि अपनी पुरानी फिल्मों के दृश्यों को दोबारा शूट किया है. निर्देशक काफी काबिल है क्योंकि उसे मालूम था कि टॉम क्रूज औ रसेल क्रोव के नाम के बिना कोई देखने नहीं आएगा.

संक्षेप में कहें तो हम बेकार में ही बॉलीवुड फिल्मों की आलोचना करते हैं कि वे कुछ भी नया नहीं बनाते और बार-बार घिसे पिटे फिल्मों का फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं. मम्मी को देखकर नहीं लगता कि हॉलीवुड किसी भी तरह बॉलीवुड से अलग है. सिर्फ टेक्नोलॉजी, स्पेशल इफेक्ट, महंगे हीरो-हीरोइन ही फर्क डालते हैं. विधु विनोद चोपड़ा ने भी हॉलीवुड के सभी मसालों का उपयोग करके हॉलीवुड के कलाकारों को लेकर फिल्म बनाई पर वह बिल्कुल नहीं चली. शायद अब वह वक्त दूर नहीं जब बॉलीवुड फिल्म निर्माता सफल होंगे बस उन्हें समय, संवाद, कहानी, स्थान को कंप्रेस करना है.

(लेखक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी, गोल्फ प्रेमी और विश्व सिनेमा पर शोध कर रहे हैं)

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